Monday, April 1, 2013
सलारगाजी हिन्दुओं के हत्यारे, हिंदू औरतों के बलात्कारी, मूर्ती भंजक दानव को हिंदू समाज एक देवता की तरह पूजता है।
हिन्दू हमेशा से अज्ञानता के अन्धकार में लिप्त रहा है,वो मजारो को पूजता है चाहे वो किसी हत्यारे की क्यों न हो.
इसका जीता-जागता उदाहरण पूर्वी उत्तर प्रदेश का एक शहर बहराइच है।
बहराइच में हिन्दू समाज का सबसे मुख्य पूजा स्थल है गाजी बाबा की मजार।
मूर्ख हिंदू लाखों रूपये हर वर्ष इस पीर पर चढाते है। इतिहास को जानने वाला हर व्यक्ति यह जानता है कि महमूद गजनवी के भारत को १७ बार लूटने व बर्बाद करने के कुछ समय बाद उसका भांजा सलार गाजी भारत को दारूल इस्लाम बनाने के उद्देश्य से भारत पर आक्रान्ता बन कर आया था ।
महमूद गजनवी द्वारा सोमनाथ मंदिर में भयानक मार काट के बाद मंदिर में लूटा गया धन इसी सालार गाजी की निगरानी में गजनी ले जाया गया था. सन 1030 में जब महमूद गजनवी की मृत्यु हो गई, तो सालार गाजी गजनी का बादशाह हुआ. बाद में 1040 में तुर्को ने गजनी को जीत लिया और सालार गाजी भारत की ओर भागा. उसे अपने इसी चारागाह की याद आई, जिसमें उसने अपने पिता के साथ बिना किसी खास रोक-टोक के लूटपाट , मारकाट की थी. यह याद आते ही सालार मसूद गाजी ने भारत में मारकाट और लूटपाट के साथ प्रवेश किया वह पंजाब ,सिंध, आज के उत्तर प्रदेश को रोंद्ता हुआ बहराइच तक आ पहुँचा था । रास्ते में उसने लाखों हिन्दुओं का कत्लेआम किया, लाखों हिंदू औरतों के साथ बलात्कार हुए, हजारों मन्दिर तोड़ डाले गए ।
राह में उसे एक भी ऐसा हिन्दू वीर नही मिला जो उसका मान मर्दन कर सके। इस्लाम की जेहाद की आंधी को रोक सके। परंतु बहराइच के राजा सुहेल देव पासी ने उसको थामने का बीडा उठाया । वे अपनी सेना के साथ सलार गाजी के हत्याकांड को रोकने के लिए जा पहुंचे । महाराजा व हिन्दू वीरों ने सलार गाजी व उसकी दानवी सेना को मूली गाजर की तरह काट डाला । सलार गाजी मारा गया। उसकी भागती सेना के एक एक हत्यारे को काट डाला गया। हिंदू ह्रदय राजा सुहेल देव पासी ने अपने धर्म का पालन करते हुए, सलार गाजी को इस्लाम के अनुसार कब्र में दफ़न करा दिया। कुछ समय पश्चात् जब दिल्ली पर तुगलक वंश के आने पर फिरोजशाह तुगलक ने सलारगाजी को इस्लाम का सच्चा संत सिपाही घोषित करते हुए उसकी मजार बनवा दी।
आज उसी हिन्दुओं के हत्यारे, हिंदू औरतों के बलात्कारी, मूर्ती भंजक दानव को हिंदू समाज एक देवता की तरह पूजता है। सलार गाजी हिन्दुओं का गाजी बाबा हो गया है। कितने दुर्भाग्य की बात है की हिंदू वीर शिरोमणि सुहेल देव पासी सिर्फ़ पासी समाज के हीरो बनकर रह गएँ है। और सलार गाजी हिन्दुओं का भगवान बनकर हिन्दू समाज में पूजनीय हो गया है। अब ऐसे हरामखोर हिन्दुओ को जो गाजी की मजार पूजने वाले, क्या कहे? जो आज उसी गाजी मियां को हिन्दु अपना कुल देवता बनाकर पूज रहें हैं. जो उन्हीं को काटने चला था. अगर वह जिन्दा होकर उठ सकता, तो अपनी कब्र पूजने वाले काफ़िर हिन्दुओं का सिर धड़ से अलग कर देता. आज गाजीमियां की तो हिन्दु धूमधाम से पूजा कर रहा है, जो उन्हें काटने आया था. लेकिन सालार मसूद गाजी को मारकर हिन्दुओं को कटने से बचाने वाले सुहेलदेव पासी का कोई नाम तक नही जानता. तैंतीस करोड़ देवताओं में क्या ऐसा कोई भी काबिल देवता था जिसे ऐसे मूर्ख हिन्दु अपना कुल देवता बना सकते? संसार में इससे बड़ी धार्मिक अनुशासनहीनता और मूर्खता का उदाहरण आपको नही मिलेगा. इस गाजी पूजा को हिन्दु-मुस्लिम एकता का बेजोड़ उदाहरण बताया जाता है. एक और मुर्खता का उदाहरण देखिये गाजी मियाँ की दरगाह पर 'जेठ मेला' की धूम देखने लायक होती है। सालार गाजी मियाँ की मजार पर हर साल जेठ में बारात भी उठती है। बिल्कुल हिंदू बारातों की तर्ज पर गाजे-बाजे के साथ उठने वाली इस बारात की धूम देखने लायक होती है।
भारत में मूर्ति भंजक के रूप में विख्यात महमूद गजनवी के भाँजे गाजी मियाँ के मुरीदों में 90 फीसदी हिंदू हैं। पूरब के जिलों के गाजी मियाँ के ये भक्त बाकायदा झंडे लेकर जेठ मेले में आते हैं। उनका विवाह नहीं हुआ था इसीलिए हर साल इनकी बारात उठती है। यहाँ इतना चढ़ावा आता है कि साल भर तक गिनती की जाती है। जेठ मेले के अलावा साल में चार बार गाजी मियाँ की दरगाह पर मेला लगता है।
आज अगर किसी मन्दिर के पास में कोई मजार है, तो हिन्दु मंदिर में कम, मजार में अधिक जायेंगे. इसके पीछे आज के हिन्दुओं के धर्म में सच्चाई, त्याग, वीरता, उत्साह और साहस के स्थान पर, स्वार्थ तथा लालच पैदा करने वाली झूठे चमत्कारों वाली कथायें हैं. हिन्दु बचपन से लेकर बूढे होने तक चमत्कारों की झूठी कहानियाँ सुनता रहता है. इसलिये वह ऐसे ही चमत्कारों को देखने की इच्छा लेकर बाबाओं, कब्रों, मज़ारों या दरगाहों में भटकता रहता है. जहाँ हाथ की सफ़ाई या चेलों द्वारा किये जा रहे नाटक से प्रभावित होकर ठगा जाता है.
अब ज़रा गाजी शब्द का अर्थ भी समझले तो आपको समझ में आयेगा की यह शब्द कितना हिन्दू विरोधी है
गाजी शब्द का अर्थ होता है वह मुस्लिम जिसने इस्लाम धर्म के प्रचार के रास्ते में आने वाले हर काफ़िर(हिन्दू ) को मिटा दिया हो या सीधे सीधे जिसने हिन्दुओ का क़त्ल करके हिंदुत्व को ही मिटाने का महान काम किया हो. काफ़िर को ईमानवाला बनाने में सफलता कैसे मिली इन गाजियों को, सीधे सीधे नरसंहार किया जाता रहा है, बाबर को भी गाजी की अपाधि दी गयी जिसने अवध के सबसे बड़े अयोध्या के भव्य राम मदिर को हिन्दुओ के नरसंहार के साथ ही मिटा दिया था और इस्लामिक राज्य स्थापित किया था. इसी तरह के सभी गाजी बाबा की मजार पर हिंदू अपने को समृद्ध करने की दुआ मागने जाता है, यही सच्चाई है, इसे जो नकारे. या तो उसे कुछ भी नहीं मालूम है या वह मजबूरी में झूठ बोल रहा है.
इसीलिए हिन्दुओं को इन आक्रान्ताओं मुस्लिमो की मजार पर नहीं जाना चाहिए; इसलिए नहीं की कोई भी मुस्लिम हिंदू मंदिरों में नहीं जाता है हिन्दुओ का दिया हुआ प्रसाद नहीं खाता है, उसका कारन बहुत ही स्पष्ट और सीधा है. कोई भी मुस्लिम कभी भी धर्म पर बहस क्यों नहीं करता है, उसके बहुत गुढ़ रहस्य हैं.
जिन मुस्लिमो की मज़ार पर हिंदू जाते हैं वे असली ईमान वाले मुस्लिम रहे थे उन्होंने इस्लाम को अक्षरसः माना था. और उनका एक ही ध्येय था साम-दाम-दंड-भेद से हर काफ़िर (मुख्यतः हिंदू) को येन-केन प्रकारेण मुसलमान बनाना था और यदि इतने पर भी उसकी बुद्धि नहीं खुलती है तो उसे क़त्ल कर दो तथा उसकी संपत्ति और औरतो को लुट लो. जिस आदमी ने जीतेजी सनातनियो (हिन्दुओ) के भले के बारे न सोचकर सिर्फ उसे मिटाने के बारे में ही सोचा, मरने के बाद उसका आशीर्वाद भला कैसे देगा.
इन्ही सच्चाइयो की वजह से हिन्दुओ को कभी भी किसी मुस्लिम की मजार पर नहीं जाना चाहिए क्योकि यदि वह हिंदू परिवार हिंदू बचा रह पाया तो अपने स्वाभिमानी पुरखो के शौर्य के बल पर और उस हिंदू को अपने इन महान पुरखो की समाधी पर जाकर उनकी पूजा करनी चाहिए नाकि उसके पुरखो को मिटाने वाले जेहादी मुस्लिमो की मजार पर शीश नवाना चाहिए.
यदि आप शिक्षित हैं तो शिक्षित होने के लक्षण भी दिखाएँ. और यदि आप ऊपर में लिखी किसी भी बात से असहमत हैं तो उसे अवश्य ही व्यक्त करे जिससे की गलत फहमी का निराकरण किया जा सके. धार्मिक विद्वानों की भी मदद लिया जा सकता है. अपनी टिप्पणी जरुर देवें.
इसका जीता-जागता उदाहरण पूर्वी उत्तर प्रदेश का एक शहर बहराइच है।
बहराइच में हिन्दू समाज का सबसे मुख्य पूजा स्थल है गाजी बाबा की मजार।
मूर्ख हिंदू लाखों रूपये हर वर्ष इस पीर पर चढाते है। इतिहास को जानने वाला हर व्यक्ति यह जानता है कि महमूद गजनवी के भारत को १७ बार लूटने व बर्बाद करने के कुछ समय बाद उसका भांजा सलार गाजी भारत को दारूल इस्लाम बनाने के उद्देश्य से भारत पर आक्रान्ता बन कर आया था ।
महमूद गजनवी द्वारा सोमनाथ मंदिर में भयानक मार काट के बाद मंदिर में लूटा गया धन इसी सालार गाजी की निगरानी में गजनी ले जाया गया था. सन 1030 में जब महमूद गजनवी की मृत्यु हो गई, तो सालार गाजी गजनी का बादशाह हुआ. बाद में 1040 में तुर्को ने गजनी को जीत लिया और सालार गाजी भारत की ओर भागा. उसे अपने इसी चारागाह की याद आई, जिसमें उसने अपने पिता के साथ बिना किसी खास रोक-टोक के लूटपाट , मारकाट की थी. यह याद आते ही सालार मसूद गाजी ने भारत में मारकाट और लूटपाट के साथ प्रवेश किया वह पंजाब ,सिंध, आज के उत्तर प्रदेश को रोंद्ता हुआ बहराइच तक आ पहुँचा था । रास्ते में उसने लाखों हिन्दुओं का कत्लेआम किया, लाखों हिंदू औरतों के साथ बलात्कार हुए, हजारों मन्दिर तोड़ डाले गए ।
राह में उसे एक भी ऐसा हिन्दू वीर नही मिला जो उसका मान मर्दन कर सके। इस्लाम की जेहाद की आंधी को रोक सके। परंतु बहराइच के राजा सुहेल देव पासी ने उसको थामने का बीडा उठाया । वे अपनी सेना के साथ सलार गाजी के हत्याकांड को रोकने के लिए जा पहुंचे । महाराजा व हिन्दू वीरों ने सलार गाजी व उसकी दानवी सेना को मूली गाजर की तरह काट डाला । सलार गाजी मारा गया। उसकी भागती सेना के एक एक हत्यारे को काट डाला गया। हिंदू ह्रदय राजा सुहेल देव पासी ने अपने धर्म का पालन करते हुए, सलार गाजी को इस्लाम के अनुसार कब्र में दफ़न करा दिया। कुछ समय पश्चात् जब दिल्ली पर तुगलक वंश के आने पर फिरोजशाह तुगलक ने सलारगाजी को इस्लाम का सच्चा संत सिपाही घोषित करते हुए उसकी मजार बनवा दी।
आज उसी हिन्दुओं के हत्यारे, हिंदू औरतों के बलात्कारी, मूर्ती भंजक दानव को हिंदू समाज एक देवता की तरह पूजता है। सलार गाजी हिन्दुओं का गाजी बाबा हो गया है। कितने दुर्भाग्य की बात है की हिंदू वीर शिरोमणि सुहेल देव पासी सिर्फ़ पासी समाज के हीरो बनकर रह गएँ है। और सलार गाजी हिन्दुओं का भगवान बनकर हिन्दू समाज में पूजनीय हो गया है। अब ऐसे हरामखोर हिन्दुओ को जो गाजी की मजार पूजने वाले, क्या कहे? जो आज उसी गाजी मियां को हिन्दु अपना कुल देवता बनाकर पूज रहें हैं. जो उन्हीं को काटने चला था. अगर वह जिन्दा होकर उठ सकता, तो अपनी कब्र पूजने वाले काफ़िर हिन्दुओं का सिर धड़ से अलग कर देता. आज गाजीमियां की तो हिन्दु धूमधाम से पूजा कर रहा है, जो उन्हें काटने आया था. लेकिन सालार मसूद गाजी को मारकर हिन्दुओं को कटने से बचाने वाले सुहेलदेव पासी का कोई नाम तक नही जानता. तैंतीस करोड़ देवताओं में क्या ऐसा कोई भी काबिल देवता था जिसे ऐसे मूर्ख हिन्दु अपना कुल देवता बना सकते? संसार में इससे बड़ी धार्मिक अनुशासनहीनता और मूर्खता का उदाहरण आपको नही मिलेगा. इस गाजी पूजा को हिन्दु-मुस्लिम एकता का बेजोड़ उदाहरण बताया जाता है. एक और मुर्खता का उदाहरण देखिये गाजी मियाँ की दरगाह पर 'जेठ मेला' की धूम देखने लायक होती है। सालार गाजी मियाँ की मजार पर हर साल जेठ में बारात भी उठती है। बिल्कुल हिंदू बारातों की तर्ज पर गाजे-बाजे के साथ उठने वाली इस बारात की धूम देखने लायक होती है।
भारत में मूर्ति भंजक के रूप में विख्यात महमूद गजनवी के भाँजे गाजी मियाँ के मुरीदों में 90 फीसदी हिंदू हैं। पूरब के जिलों के गाजी मियाँ के ये भक्त बाकायदा झंडे लेकर जेठ मेले में आते हैं। उनका विवाह नहीं हुआ था इसीलिए हर साल इनकी बारात उठती है। यहाँ इतना चढ़ावा आता है कि साल भर तक गिनती की जाती है। जेठ मेले के अलावा साल में चार बार गाजी मियाँ की दरगाह पर मेला लगता है।
आज अगर किसी मन्दिर के पास में कोई मजार है, तो हिन्दु मंदिर में कम, मजार में अधिक जायेंगे. इसके पीछे आज के हिन्दुओं के धर्म में सच्चाई, त्याग, वीरता, उत्साह और साहस के स्थान पर, स्वार्थ तथा लालच पैदा करने वाली झूठे चमत्कारों वाली कथायें हैं. हिन्दु बचपन से लेकर बूढे होने तक चमत्कारों की झूठी कहानियाँ सुनता रहता है. इसलिये वह ऐसे ही चमत्कारों को देखने की इच्छा लेकर बाबाओं, कब्रों, मज़ारों या दरगाहों में भटकता रहता है. जहाँ हाथ की सफ़ाई या चेलों द्वारा किये जा रहे नाटक से प्रभावित होकर ठगा जाता है.
अब ज़रा गाजी शब्द का अर्थ भी समझले तो आपको समझ में आयेगा की यह शब्द कितना हिन्दू विरोधी है
गाजी शब्द का अर्थ होता है वह मुस्लिम जिसने इस्लाम धर्म के प्रचार के रास्ते में आने वाले हर काफ़िर(हिन्दू ) को मिटा दिया हो या सीधे सीधे जिसने हिन्दुओ का क़त्ल करके हिंदुत्व को ही मिटाने का महान काम किया हो. काफ़िर को ईमानवाला बनाने में सफलता कैसे मिली इन गाजियों को, सीधे सीधे नरसंहार किया जाता रहा है, बाबर को भी गाजी की अपाधि दी गयी जिसने अवध के सबसे बड़े अयोध्या के भव्य राम मदिर को हिन्दुओ के नरसंहार के साथ ही मिटा दिया था और इस्लामिक राज्य स्थापित किया था. इसी तरह के सभी गाजी बाबा की मजार पर हिंदू अपने को समृद्ध करने की दुआ मागने जाता है, यही सच्चाई है, इसे जो नकारे. या तो उसे कुछ भी नहीं मालूम है या वह मजबूरी में झूठ बोल रहा है.
इसीलिए हिन्दुओं को इन आक्रान्ताओं मुस्लिमो की मजार पर नहीं जाना चाहिए; इसलिए नहीं की कोई भी मुस्लिम हिंदू मंदिरों में नहीं जाता है हिन्दुओ का दिया हुआ प्रसाद नहीं खाता है, उसका कारन बहुत ही स्पष्ट और सीधा है. कोई भी मुस्लिम कभी भी धर्म पर बहस क्यों नहीं करता है, उसके बहुत गुढ़ रहस्य हैं.
जिन मुस्लिमो की मज़ार पर हिंदू जाते हैं वे असली ईमान वाले मुस्लिम रहे थे उन्होंने इस्लाम को अक्षरसः माना था. और उनका एक ही ध्येय था साम-दाम-दंड-भेद से हर काफ़िर (मुख्यतः हिंदू) को येन-केन प्रकारेण मुसलमान बनाना था और यदि इतने पर भी उसकी बुद्धि नहीं खुलती है तो उसे क़त्ल कर दो तथा उसकी संपत्ति और औरतो को लुट लो. जिस आदमी ने जीतेजी सनातनियो (हिन्दुओ) के भले के बारे न सोचकर सिर्फ उसे मिटाने के बारे में ही सोचा, मरने के बाद उसका आशीर्वाद भला कैसे देगा.
इन्ही सच्चाइयो की वजह से हिन्दुओ को कभी भी किसी मुस्लिम की मजार पर नहीं जाना चाहिए क्योकि यदि वह हिंदू परिवार हिंदू बचा रह पाया तो अपने स्वाभिमानी पुरखो के शौर्य के बल पर और उस हिंदू को अपने इन महान पुरखो की समाधी पर जाकर उनकी पूजा करनी चाहिए नाकि उसके पुरखो को मिटाने वाले जेहादी मुस्लिमो की मजार पर शीश नवाना चाहिए.
यदि आप शिक्षित हैं तो शिक्षित होने के लक्षण भी दिखाएँ. और यदि आप ऊपर में लिखी किसी भी बात से असहमत हैं तो उसे अवश्य ही व्यक्त करे जिससे की गलत फहमी का निराकरण किया जा सके. धार्मिक विद्वानों की भी मदद लिया जा सकता है. अपनी टिप्पणी जरुर देवें.
इस्लामाबाद, पाकिस्तान में फ़िर एक बार हिंदू मंदिर को निशाना बनाया गया है।
इस्लामाबाद, पाकिस्तान में फ़िर एक बार हिंदू मंदिर को निशाना बनाया गया है।(Source: IBTL)
पेशावर शहर स्थित ऐतिहासिक हिंदू मंदिर पर रविवार की शाम अज्ञात लोगों ने हमला किया और उसे तहस नहस कर डाला। गोरखनाथ मंदिर के नाम से मशहूर 160 साल पुराने इस मंदिर को पेशावर हाई कोर्ट के आदेश पर तीस सालों बाद पिछले ही साल फिर से खोला गया था। देश के विभाजन के बाद से तब तक यह मंदिर बंद पड़ा था।
पुलिस ने बताया कि हमलावरों ने मंदिर में लगी तस्वीरों को जला दिया और मंदिर के अंदर स्थापित शिवलिंग को क्षतिग्रस्त कर दिया। वे गोर गथरी इलाके के पुरातात्विक परिसर में स्थित इस मंदिर की कुछ मूर्तियां भी उठा ले गए। मंदिर के संरक्षक ने मीडिया को बताया कि पिछले दो महीने में मंदिर पर यह तीसरा हमला है। उसने अनुसार, शाम साढ़े छह बजे जब वह मंदिर पहुंचा तो मंदिर के अंदर आठ लोगों का एक समूह था। उन लोगों ने भागने से पहले मंदिर में लगी तस्वीरें और धार्मिक पुस्तकें जला दीं। इसके बाद अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के लोग मंदिर पर पहुंचे।
टीवी फुटेज में जले हुए कागज और फर्श पर बिखरे बर्तन दिखाई दे रहे हैं। पुलिस अधिकारियों ने मंदिर के अंदर जाकर जांच की। हिंदू नेताओं ने पुलिस से मंदिर की पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था करने का आग्रह किया है ताकि ऐसी घटनाएं रोकी जा सकें। पाकिस्तान में हिंदूओ पर आये दिन इस तरह के अत्याचार होते रहते है। बहुत बार हिंदू मंदिरों को निशाना बनाकर उसकी तोडफ़ोड की जाती है। हिंदू लडकियों का अपहरण कर के उनका जबरन धर्मपरिवर्तन कराया जाता है।
हाल ही में रिंकल कुमारी नामक लडकी के जबरन धर्मपरिवर्तन की घटना सामने आयी थी। दुर्भाग्य की बात ये है कि हिंदूओ के साथ हो रही इस नाइंसाफ़ी को स्थानिक प्रशासन और पाकिस्तान सरकार अनदेखा कर रही है।
पेशावर शहर स्थित ऐतिहासिक हिंदू मंदिर पर रविवार की शाम अज्ञात लोगों ने हमला किया और उसे तहस नहस कर डाला। गोरखनाथ मंदिर के नाम से मशहूर 160 साल पुराने इस मंदिर को पेशावर हाई कोर्ट के आदेश पर तीस सालों बाद पिछले ही साल फिर से खोला गया था। देश के विभाजन के बाद से तब तक यह मंदिर बंद पड़ा था।
पुलिस ने बताया कि हमलावरों ने मंदिर में लगी तस्वीरों को जला दिया और मंदिर के अंदर स्थापित शिवलिंग को क्षतिग्रस्त कर दिया। वे गोर गथरी इलाके के पुरातात्विक परिसर में स्थित इस मंदिर की कुछ मूर्तियां भी उठा ले गए। मंदिर के संरक्षक ने मीडिया को बताया कि पिछले दो महीने में मंदिर पर यह तीसरा हमला है। उसने अनुसार, शाम साढ़े छह बजे जब वह मंदिर पहुंचा तो मंदिर के अंदर आठ लोगों का एक समूह था। उन लोगों ने भागने से पहले मंदिर में लगी तस्वीरें और धार्मिक पुस्तकें जला दीं। इसके बाद अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के लोग मंदिर पर पहुंचे।
टीवी फुटेज में जले हुए कागज और फर्श पर बिखरे बर्तन दिखाई दे रहे हैं। पुलिस अधिकारियों ने मंदिर के अंदर जाकर जांच की। हिंदू नेताओं ने पुलिस से मंदिर की पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था करने का आग्रह किया है ताकि ऐसी घटनाएं रोकी जा सकें। पाकिस्तान में हिंदूओ पर आये दिन इस तरह के अत्याचार होते रहते है। बहुत बार हिंदू मंदिरों को निशाना बनाकर उसकी तोडफ़ोड की जाती है। हिंदू लडकियों का अपहरण कर के उनका जबरन धर्मपरिवर्तन कराया जाता है।
हाल ही में रिंकल कुमारी नामक लडकी के जबरन धर्मपरिवर्तन की घटना सामने आयी थी। दुर्भाग्य की बात ये है कि हिंदूओ के साथ हो रही इस नाइंसाफ़ी को स्थानिक प्रशासन और पाकिस्तान सरकार अनदेखा कर रही है।
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