*बांगरू बाण*
*श्रीपादावधूत की कलम से*
**आइए आज जानते हैं ठाकुर, भंवर/भंवरी, तंवर/तंवरी, कुंवर, यह नाम नहीं उपाधियां है और यह किन को प्राप्त होती है।*
*राजस्थानी संस्कृति में राजपूतों को ठाकुर कहने की परंपरा है। लेकिन हमें यह नहीं पता कि ठाकुर कहते किसको है।*
*शोले का संजीव कुमार का कैरेक्टर ठाकुर सबको पता है इसीलिए हम सभी राजपूत भाइयों को ठाकुर कह देते हैं जो सही नहीं है।*
*ठाकुर यह वह पदवी है जो किसी पुत्र को तब मिलती है जब वह परिवार का मुखिया बनता है अर्थात जब उसके पिता का देहांत होता है और पिता के स्थान पर जब उसके पास मुखिया का पद आता है तब वह ठाकुर कहलाता है इसलिए कोई भी व्यक्ति ठाकुर कहलाना इसलिए पसंद नहीं करता क्योंकि इसके लिए उनके पिता का देहांत होना आवश्यक होता है और कोई भी बेटा अपने पिता का देहांत नहीं चाहता।* *इसलिए आगे से आप ठाकुर उसी व्यक्ति को कहिए जिसके पिता जीवित नहीं है और वह घर का मुखिया है।*
*इसी प्रकार एक नाम आपने भंवर सुना होगा। आपने कई लोगों के नाम भंवर या भंवरी सुना होगा यह भी एक तरह की पदवी है। जिस बच्चे के दादा जीवित होते हैं और वह बच्चा होता है तो उसका नामकरण भंवर अगर वह लड़का है और लड़की है तो भंवरी यह रखा जाता था।*
*हां जी यह सुनकर आपको बड़ा अजीब लग सकता है कि दादा के जीवित रहते हर व्यक्ति का नाम भंवर या भंवरी रखना इसमें क्या औचित्य है। क्योंकि सामान्यतया हर बच्चे के जन्म के समय उसके दादा जीवित रहते ही हैं इसलिए यह तो एक सामान्य प्रक्रिया है इसी को आधार बनाया जाए तो लगभग 90 से 95% बच्चों का नाम भंवर या भंवरी होना चाहिए। लेकिन यह घटना है उस समय की है जब राजस्थान की राजपूताना कौम सदैव युद्ध में रत रहती थी और युद्ध में राजपूत वीरों का बलिदान होते ही रहता था इसलिए बहुत ही वीर और पराक्रम शाली राजपूत ही अपने जिंदा रहते दादा बन पाता था । अर्थात अपने आंखों से अपने पोते या पोती को देख पाता था। इसीलिए वह अपने पोते या पोती का नाम भंवर या भंवरी रखता था। भंवर या भंवरी यह नाम समाज में उस बच्चे को एक अलग से प्रतिष्ठा दिलाते थे कि वह कितना सौभाग्यशाली है कि उसके सर पर उसके दादा का आशीर्वाद अभी तक बना हुआ है।*
*इसी प्रकार तंवर या तंवरी यह नामकरण भी भंवर या भंवरी से ज्यादा श्रेष्ठ माना जाता था। क्योंकि तंवर या तंवरी यह नाम उस बालक या बालिका का रखा जाता था जिसके परदादा जीवित रहे हो जो अपने आप में बहुत ही रेयर ऑफ द रेयर अर्थात बहुत ही कम देखने को मिलता था। इसलिए तंवर नाम की श्रेष्ठता भंवर नाम से अधिक मानी गई है*
*बाकी आप सब लोग तो जानते ही हैं कुंवर यह उपाधि हर उस बालक को प्राप्त होती है जिनके पिताजी जीवित हैं।*

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