*भूली बिसरी यादें*
श्रीपादावधूत अवधूत की कलम से
*संघ के चौथे सरसंघचालक परम पूज्य श्री रज्जु भैया ने कहा था कि, १० नये व्यक्ति भले न जुड़े पर एक भी पुराना कार्यकर्ता टूटना नही चाहिए इसका सदैव ध्यान रखें।*
*इसलिए पद प्रतिष्ठा और पैसे के इस दौर में पैदल चलकर संगठन खड़ा करने वाले लोगों को कभी ना भूले कोई भी संगठन मशीनी नहीं होता वह मानवीय होता है।*
*समय-समय पर सबकी भूमिकाए बदल सकती है। पर आज आप जहां हो उस संगठन को वहां तक लाने के लिए पुराने कार्यकर्ताओं ने बहुत कुछ दांव पर लगाया है।* *इसलिए वर्तमान चकाचौंध में और हर बात में विकल्प की तलाश में अपने पुराने कार्यकर्ताओं को भूलना उनके समर्पण को नजरअंदाज करना मूर्खता ही नहीं पाप भी होता है।*
*आज तो बहुत अनुकूलता हैं, साधन हैं, गाड़ियां हैं पर जिन लोगों ने पैदल चलकर चने, सेव व परमल खाकर साइकिल, पैदल चलकर संगठन खड़ा करने का काम किया हैं उन लोगों को नजरअंदाज करना या भूलना उसके समर्पण के साथ न्याय नहीं है।*
*संगठन मशीनों वाहनों और दिमाग से नहीं होता, संगठन शुद्ध सात्विक प्रेम से होता है शुद्ध सात्विक प्रेम ही कार्यकर्ताओं को दांव पर लगाने की हिम्मत देता है।*
*इसलिए चिर पुरातन नित्य नूतन की हमारी अवधारणा के साथ हमें कार्यकर्ताओं में भी यही भाव जागृत रखना चाहिए।*
*परम पूज्य श्री रज्जु भैया के जन्म जयन्ती वर्ष पर यही सच्ची श्रद्धांजलि होगी।*
*नोट:-* *इस तरह की बातें केवल श्रद्धांजलि वाले दिन ही याद आती है। दूसरों को उपदेश देने हेतु बौद्धिकों में प्रयोग में लाई जाती है।*
अवधूत चिंतन श्री गुरुदेव दत्त

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