श्रीपादावधूत की कलम से
*संसद भवन में सेंगोल स्थापित कर प्राचीन सनातन वैदिक हिन्दू संस्कृति की महान परंपरा को भारत के घर घर में पुनर्जीवित करने के मोदी जी के प्रयासों का हृदय की गहराइयों से आभार।*
*भारतीय पारिवारिक #सेंगोल जो प्रत्येक परिवार में हर बुजुर्ग के हाथ में सदैव रहता था।जिससे वे पूरे परिवार को नियंत्रित करते थे। वे ग़लती करने पर इसी #सेंगोल राजदंड से दंड भी देते थे। जो बहुत पीड़ादायक होता था और गलती करने वाला कभी भी उस गलती को दोहराने की हिम्मत नहीं करता था। लेकिन आजकल हमारे #बुजुर्गों का ये सेंगोल भी कहीं #विलुप्त हो गया है और इसी के परिणामस्वरूप सब परिवार #बिखराव की ओर बढ़ रहे हैं।*
*मास्टरजी के पास भी यह कुटाई वाला #सेंगोल होता था। जो पढ़ाई-लिखाई में सहायक होता था। जो बच्चे अनुशासनहीनता करते थे। उनकी अच्छी तरह से खबर लेता था।*
*छड़ी बाजे छम छम*
*विद्या आये घम घम*
*यह शिक्षण का मूलमंत्र था। इसी कारण छात्रों को शिक्षित करने का यह रामबाण उपाय था। लेकिन मैकाल की शिक्षण पद्धति से इसे विस्मृत कर दिया गया। इसका ही यह परिणाम है कि वर्तमान में हमारे अपने बच्चे भी कई बार #विपक्षियों वाला बर्ताव करने लगते हैं।*
*धर्मगुरुओं के पास भी धर्मदंड होता था जो राजदंड के गलत निर्णयों पर समाज की कुरीतियों पर सदैव चलता था।*
*गांव के पंच परमेश्वरों के पास भी यह न्यायदंड होता था। जिससे वे पंचायत में न्याय करते थे।*
*जिस जिस घर/मंदिर/पंचायत में ये सब होता है उस घर/मंदिर/पंचायत के बड़े बुजुर्ग से #विनंती है के वो भी अपने सेंगोल को तलाश करें उसका #उपयोग करें।*
*फिर देखिए कैसे #बिखरे हुए और #अनियंत्रित लोग #एकजुट होते हैं फिर वो चाहे आपका परिवार हो या आपका देश।*
अवधूत चिंतन श्री गुरुदेव दत्त

No comments:
Post a Comment