*बांगरू-बाण*
श्रीपादावधूत की कलम से
*बदन दर्द, कमर दर्द, सर्वाइकल और चारपाई/खाट/खटिया*
*बदन दर्द, कमर दर्द और सर्वाइकल का चारपाई या खाट से क्या संबंध है यह प्रश्न आपके मन में उत्पन्न हुआ होगा?*
*प्रथम दृष्टया तो इनका खटिया से कोई संबंध है यह हमारी जानकारी में ही नहीं होगा। लेकिन सच यही है। वर्तमान समय में अधिकांश लोगों को कमर दर्द सर्वाइकल का प्रॉब्लम केवल और केवल गैर पारंपरिक इंग्लिश बेड जिसे सामान्य भाषा में हम पलंग कहते हैं और जिस पर फोम के गद्दे बिछाए जाते हैं के कारण ही उत्पन्न होता है।*
*हमारे पूर्वज बहुत ही जानकार थे वह विज्ञान को अच्छी तरह से जानते थे शरीर विज्ञान आरोग्य शास्त्र का उन्हें पूरा पूरा ज्ञान था और इसीलिए उनके प्रत्येक आचार, विचार, व्यवहार में विज्ञान व आयुर्वेद का मिलाजुला स्वरूप प्रयुक्त होता था जो उन्हें स्वस्थ रखने में सहायक होता था । सोने के लिए खाट हमारे पूर्वजों की सर्वोत्तम खोज है। हमारे पूर्वज क्या लकड़ी को चीरना नहीं जानते थे ? वे भी लकड़ी चीरकर उसकी पट्टियाँ बनाकर डबल बेड बना सकते थे। डबल बेड बनाना कोई रॉकेट साइंस नहीं है। लकड़ी की पट्टियों में कीलें ही ठोंकनी होती हैं। चारपाई भी भले कोई साइंस नहीं है, लेकिन एक समझदारी है कि कैसे शरीर को अधिक आराम मिल सके। चारपाई बनाना एक कला है। उसे रस्सी से बुनना पड़ता है और उसमें दिमाग और श्रम लगता है।*
*जब हम सोते हैं, तब सिर और पांव के मुकाबले पेट को अधिक खून की आवश्यकता होती है ; क्योंकि रात हो या दोपहर में लोग अक्सर खाने के बाद ही सोते हैं। पेट को पाचनक्रिया के लिए अधिक खून की आवश्यकता होती है। इसलिए सोते समय चारपाई की झोली ही इस स्वास्थ का लाभ पहुंचा सकती है।*
*दुनिया में जितनी भी आरामकुर्सियां देख लें, सभी में चारपाई की तरह झोली बनी होती है। बच्चों का पुराना पालना सिर्फ कपडे की झोली का था, लकडी का सपाट बनाकर उसे भी बिगाड़ दिया गया है।* *चारपाई पर सोने से कमर और पीठ का दर्द कभी नही होता है। आजकल डॉक्टरों के द्वारा दर्द होने पर चारपाई पर सोने की सलाह दी जाती है। आज भी गांव में जच्चा और बच्चा को खटिया पर ही सुलाया जाता है। अधिकांश गांव में इस तरह की खटिया या चारपाई केवल और केवल उन महिलाओं के लिए ही बनी होती है जिन्होंने अभी अभी बच्चा पैदा किया है और वह इस खटिया पर लगभग सवा महीने तक सोती है।*
*डबलबेड के नीचे अंधेरा होता है, उसमें रोग के कीटाणु पनपते हैं, वजन में भारी होता है तो रोज-रोज सफाई नहीं हो सकती। चारपाई को रोज सुबह खड़ा कर दिया जाता है और सफाई भी हो जाती है, सूरज का प्रकाश बहुत बढ़िया कीटनाशक है।* *खटिया को धूप में रखने से खटमल इत्यादि भी नहीं लगते हैं। अगर किसी मरीज को डॉक्टर Bed Rest लिख देता है तो दो तीन दिन में उसको English Bed पर लेटने से Bed -Soar शुरू हो जाता है । भारतीय चारपाई ऐसे मरीजों के बहुत काम की होती है । चारपाई पर Bed Soar नहीं होता क्योकि इसमें से हवा आर पार होती रहती है। गर्मियों में इंग्लिश Bed जो कि फोम का या फाइबर का बना होता है गर्म हो जाता है इसलिए AC की अधिक जरुरत पड़ती है जबकि सनातन चारपाई पर नीचे से हवा लगने के कारण गर्मी बहुत कम लगती है ।*
*सूत की रस्सियों से बुनी चारपाई पर सोने से सारी रात Automatically सारे शरीर का Acupressure होता रहता है ।*
*गर्मी में छत पर चारपाई डालकर सोने का आनंद ही कुछ और है। ताज़ी हवा, बदलता मौसम, तारों की छांव ,चन्द्रमा की शीतलता जीवन में उमंग भर देती है । हर घर में एक स्वदेशी बाण(सूत की रस्सी) की बुनी हुई (प्लास्टिक की नहीं ) चारपाई होनी चाहिए ।50 वर्ष की आयु के बाद तो सोने के लिए चारपाई से अच्छा कोई साधन ही नहीं है। दिन में सोने के लिए या बैठने के लिए केवल चारपाई का प्रयोग करना चाहिए उस पर कुछ भी नहीं डालना चाहिए। उस पर बैठने या सोने से आपके शरीर के अधिकांश अंग सूत की रस्सी के संपर्क में आने से एक तरह से एक्यूप्रेशर का काम करते हैं। रात्रि में आवश्यक हो तो आप गादी या गद्दा बिछा लें लेकिन अगर केवल मोटी दरी डालकर सोएंगे तो ज्यादा लाभदायक रहेगा। अंग्रेजी में जिसे आप रिलैक्स कहते हैं वह रिलैक्सेशन की प्रक्रिया केवल और केवल चारपाई या खाट पर सोने से ही प्राप्त होती है।*
*इसलिए प्राचीन सनातन भारतीय संस्कृति के आचार, विचार, व्यवहार और संस्कारों को अपनाते चलें जो आपके हित में है।*
अवधूत चिंतन श्री गुरुदेव दत्त..!!!

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