*बांगरू-बाण*
श्रीपादावधूत की कलम से
*शाब्दिक सुबह*
*अर्थपूर्ण दिवस*
🌹 *गुंडा* 🌹
*यह शब्द सुनते ही हमारे मन-मस्तिष्क में एक बहुत ही दुर्दांत अपराधी समाजकंटक ऐसी तस्वीर उभरती है लेकिन क्या वास्तव में गुंडा शब्द इन लोगों के लिए जो प्रयुक्त होता है वह सही एवं सटीक है क्या..??*
*जी नहीं गुंडा शब्द का अर्थ होता है गुणों से युक्त*
*फिर प्रश्न उत्पन्न होता है कि गुंडा यह शब्द अपराधी बदमाश के अर्थ में कब क्यों और कैसे प्रचलित हो गया तो आइए आज जानते हैं गुंडा शब्द का सही एवं समीचीन अर्थ।*
*कबीर ने "गुंडा " शब्द का प्रयोग किया ?*
*नहीं।*
*सूरदास ने " गुंडा " शब्द का प्रयोग किया ?*
*नहीं।*
*तुलसी ने " गुंडा " शब्द का प्रयोग किया ?*
*नहीं ।*
*जायसी , बिहारी , मतिराम , चिंतामणि आदि प्राचीन कवियों में से किसी ने " गुंडा " शब्द का प्रयोग किया ?*
*नहीं ।*
*प्राचीन काल के कवियों को छोड़िए , आधुनिक काल में हिंदी साहित्य के पुरोधा माने जाने वाले भारतेंदु हरिश्चंद्र ने " गुंडा " शब्द का प्रयोग किया ?*
*नहीं ।*
*20 वीं शताब्दी से पहले दुनिया में किसी ने भी बदमाश के अर्थ में " गुंडा " शब्द का प्रयोग नहीं किया है ।*
*तो आइए जानते हैं गुंडा शब्द का असली अर्थ क्या है और यह कैसे प्रचलन में आया।*
*आज "गुंडा" एक गाली है।* इसे आजकल किसी के ऊपर भी बड़ी सहजता से चस्पां कर दिया जाता है। और तो और *हमारे आर्मी चीफ, जनरल रावत, तक को “सड़क का गुंडा” बता दिया* गया। *बेनी प्रसाद वर्मा ने मोदी जी के प्रधान-मंत्री बनने से पहले आर एस एस के “सबसे बड़े गुंडे”* कहकर सम्मानित (?) किया था।
*अजब नहीं तुक्का, जो तीर हो जाए।*
*दूध फट जाए कभी तो, पनीर हो जाए।*
*मवालियों को न देखा करो, हिकारत से*
*न जाने कौन सा गुंडा, वजीर हो जाए।*
*पुलिस को तो“वर्दी वाला गुंडा”* कहना आम बात है। *छोटे-मोटे अपराधी "गली-छाप गुंडे"* कहलाते हैं। कुछ टेक्स सरकार लगाती है, *कुछ गुंडे वसूल करते हैं। इसे "गुंडा-टेक्स" कहा जाता है।* *गुंडों से बचने के लिए हमारे यहाँ बाकायदा "गुंडा-एक्ट" हैं, एंटी-रोमियो "गुंडा एक्ट" भी है। "गुंडा-स्क्वाड" है। आम जनता जो "गुंडों" और "गुंडा-एक्ट", दोनों से ही त्रस्त है,* अक्सर सवाल करती है, क्या गुंडा स्क्वैड वास्तव में गुंडों को बचाने के लिए गुंडों का ही स्क्वाड तो नहीं है ? और उसे कोई संतोषजनक उत्तर नहीं मिल पाता। सभी को विदित है कि *बहुत से सफ़ेद-पोश, नेता लोग अपने स्वार्थ साधने के लिए "किराए के गुंडे" भी पाल लेते हैं।*
*उत्तर भारत में जो हिन्दुस्तानी ज़बान बोली जाती है, उसमें गुंडा शब्द का अर्थ बदमाश, दुर्वृत्त, खोंटे चाल-चलन वाला, उदंड और झगड़ालु व्यक्ति से लगाया जाता है।*
*गुंडाशाही, गुंडागर्दी, गुंडई और गुंडाराज जैसे पद भी "गुंडा" शब्द से ही बने हैं। किन्तु दक्षिण भारत की भाषाओं में प्राय: "गुंड" और "गुंडा" शब्दों में कोई अनैतिक और नकारात्मक भाव नहीं है।*
*मराठी में "गाँव-गुंड" ग्राम नायक या ग्राम-योद्धा है। वहां गुंडा के मूल में प्रधान या नेता का भाव है।*
*इसी प्रकार मराठी के संत कवि जगद्गुरु तुकाराम महाराज ने भी अपने अभंग में गुंडा शब्द का प्रयोग किया है वह अभंग इस प्रकार है।*
*"पुत्र व्हावा ऐसा गुंडा। त्याचा तिही लोकी झेंडा। कन्या ऐसी देई। जैसी मिरा मुक्ताबाई ।।"*
*अर्थात पुत्र ऐसा होना चाहिए जिसका यश तीनों लोकों में प्रसिद्ध होना चाहिए। यहां गुंडा शब्द का अर्थ उसका यश उसके प्रसिद्धि के अर्थ में प्रयुक्त हुआ है।*
*तमिल में भी गुंडा शब्द एक शक्तिशाली और ताकतवर नायक की अर्थवत्ता प्रदान करता है। "गुंडराव" "गुंडराज" जैसे पद इसके उदाहरण हैं। दक्षिण भारत के राज्य कर्नाटक के एक बड़े कांग्रेसी नेता का नाम आप सबको याद होगा आर. गुंडू राव। जो कर्नाटक के मुख्यमंत्री रहे। वर्तमान में कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार बनी है और इस सरकार में एक मंत्री इन्हीं आर. गुंडूराव के पुत्र हैं जिनका नाम है दिनेश गुंडू राव।*
*वस्तुत: "गुंड" का अर्थ किसी उभार या गाँठ से है। किसी समतल जगह पर कोई भी उभार अपनी एक विशिष्ठता की छाप छोड़ता है। इसी तरह समाज में किसी व्यक्ति का उभार उसे ख़ास बना देता है। वह समाज का नायक हो जाता है। गुंड का अर्थ इस प्रकार नायक, योद्धा या शूरवीर से लगाया जाता है।*
*हिन्दी के अधिकतर कोशों में "गुंड" और "गुंडा" शब्दों की व्युत्पत्ति संस्कृत के “गुन्डक:” पद से बताई गई है। संस्कृत में "गुन्डक:" का अर्थ "धूलि या धूलमिला आटा" है। तैलपात्र तथा मंद स्वर" को भी गुन्डक कहा जाता है। संस्कृत के गुन्डक में इस प्रकार न तो नायकत्व की भावना है और न ही कोई दुर्वृत्ति है।*
*हिंदी में " गुंडा " शब्द अंग्रेजों की फाइल से आया है , तब जब 20 वीं शताब्दी के पहले दशक में बस्तर के आदिवासी स्वतंत्रता सेनानी "वीर गुंडा" को अंग्रेजों ने गुंडा ( बदमाश ) मान लिया ।*
*भारतीयों की नजर में वीर गुंडा स्वतंत्रता सेनानी थे, मगर अंग्रेजों की नजर में बिगड़ैल, बदमाश अंग्रेजी सत्ता को चुनौती देने वाले।*
*इसलिए अंग्रेजों ने एक कानून बनाया और उसे नाम दिया "गुंडा-एक्ट" । और जो भी भारतीय अंग्रेजी सत्ता के खिलाफ खड़ा होता या विरोध करता उसे वे "गुंडा-एक्ट" के तहत जेल में बंद कर देते थे।*
*वस्तुत: "गुंडा" एक जनजाति के नायक और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी का नाम है, जिसने अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी।*
*इसीलिए "गुंडा" शब्द का प्रयोग पहली बार अंग्रेजों ने बदमाश" के अर्थ में किया।*
*इस योद्धा का पूरा नाम "गुंडा धुर" था। 1910 में अंग्रेजों के खिलाफ छत्तीसगढ़ के बस्तर में "भूमकाल-विद्रोह" में इस "गुंडा धुर" वीर ने अंग्रेजों के छक्के छुड़ा दिए थे। अंग्रेजी शासन के दस्तावेजों में "गुंडा धुर" को विद्रोही और "गुंडा" (बदमाश, उद्दंडतापूर्वक आचरण करनेवाला) बतलाया गया है।*
*अंग्रेजों की नजर में "गुंडा धुर" की छवि उद्दंड और बदमाश की थी पर अपने देशवासियों की नजर में वे स्वतंत्रता सेनानी और वीर थे। कालेन्द्र सिंह के नेतृत्व में अंग्रेजों के खिलाफ क्रांति की सुनियोजित रूपरेखा तैयार की गई थी। रानी सुबरन कुँवर ने क्रांतिकारियों की सभा में "मुरिया राज" की स्थापना की घोषणा की। रानी के सुझाव पर "वीर गुंडा धुर" को "भूमकाल-विद्रोह" का नेता निर्वाचित किया गया।*
*1 फरवरी, 1910 को संपूर्ण बस्तर में अंग्रेजी दासता के विरुद्ध विद्रोह का बिगुल बज उठा।*
*विडंबना देखिए गुलामी की मानसिकता से ग्रस्त भारत के कोशकारों ने अंग्रेजों का अनुगमन करके "गुंडा" का अर्थ "बदमाश" कर दिया है।*
*अब जब स्वतंत्रता के 75 वर्ष पूरे होने को है और एक नया इतिहास लिखा जाना है भारतीय कोशकारों की जिम्मेदारी है कि अंग्रेजों द्वारा प्रयुक्त "बदमाश" के अर्थ में "गुंडा" शब्द को डिक्शनरी से बाहर करके, "वीर स्वतंत्रता सेनानी" के अर्थ में उसे प्रचलित किया जाना चाहिए। "बदमाश" के अर्थ में "गुंडा" शब्द एक जनजाति समाज के स्वतंत्रता सेनानी का अपमान है।*
*यह कहानी है गुंडा शब्द के कानून बनने और उसके बदमाश के अर्थ में प्रचलित होने की लेकिन दुर्भाग्य देखिए इस देश को स्वतंत्र हुए 75 वर्ष हो गए हैं और आज भी आजाद भारत में "गुंडा-एक्ट" अस्तित्व में है।*
*क्यों ?*
*जिसने देश को आजाद कराया, वहीं गुंडा धुर*
*गुंडा है बदमाश है*
अवधूत चिंतन श्री गुरुदेव दत्त।

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