भगवान अमरनाथ की पवित्र गुफा के समान ही आस्ट्रिया में भी गुफा की खोज हुई है जिसमें ठीक उसी तरह का बर्फ से बना शिवलिंग मिला है। जैसा कि सैकड़ों सालों से अमरनाथ धाम में बनता आया है। इस तरह की शिवलिंग की शिलाएं सिर्फ यूरोप में पाई गईं। यूरोप मे
ं आस्ट्रिया की ईस्रीसनवेल्ट और स्लोवालिया में डिमेनोवस्का की गुफाएं अमरनाथ की तरह है। ईस्रीसनवेल्ट गुफाएं सबसे बड़ी है और इनकी बर्फ शिलाओं का आकार पवित्र अमरनाथ की तुलना में शिवलिंग से बहुत अधिक मिलता है।
ये आस्ट्रिया में सेल्जबर्ग क्षेत्र में गुफाओं के जाल के रूप में 40 किमी के दायरे में फैला है। 1879 में सेल्जबर्ग के एन्टन पोसेल्ट नामक वैज्ञानिक ने इन गुफाओं में 200 मीटर तक जाकर इनकी औपचारिक खोज अपने नाम दर्ज कराई और इसे माउन्टनोयरिंग मेगजीन में छपवाया, इससे पहले यहां सिर्फ शिकारी जाया करते थे। 1920 से यहां पर्यटकों का आवागमन शुरू हुआ। भूवैज्ञानिक और वैज्ञानिक परीक्षणों से ज्ञात होता है कि ये बर्फ की शिलाएं करीब 1000 साल पुरानी है।
ये बिल्कुल बर्फ के शिवलिंग के समान दिखती है।अमरनाथ के शिवलिंग मंदिर और ईस्रीसनवेल्ट गुफाओं में एक अन्यसमानता यह भी है कि यहां बर्फ का गठन बारहमासी नहीं है। ये दोनों गुफाएं गतिशील और चक्रीय मौसम परिवर्तनों से प्रभावित होती है। इनमें पड़ी दरारें यहां आने वाली हवा को तरल रूप में यहां से वहां प्रवाहित होने देती है। गुफाओं के भीतर का तापमान बाहर के तापमान की तुलना में सर्दियों में गर्म और गर्मियों में ठंडा रहता है। सर्दियों में जब गुफाओं में हवा अपेक्षाकृत गर्म होती है तो बाहर के वायुमण्डल की ठंडी हवा आकार गुफाओं की निचली सतह के क्षेत्र को जमाव बिंदु से नीचे ले आती है। गर्मियों में ये बर्फ की शिलाएं गलना शुरू हो जाती है और इनका प्रतिरूप उत्कृष्ठ प्रतिमाओं के रूप देखा जा सकता है ।
ये आस्ट्रिया में सेल्जबर्ग क्षेत्र में गुफाओं के जाल के रूप में 40 किमी के दायरे में फैला है। 1879 में सेल्जबर्ग के एन्टन पोसेल्ट नामक वैज्ञानिक ने इन गुफाओं में 200 मीटर तक जाकर इनकी औपचारिक खोज अपने नाम दर्ज कराई और इसे माउन्टनोयरिंग मेगजीन में छपवाया, इससे पहले यहां सिर्फ शिकारी जाया करते थे। 1920 से यहां पर्यटकों का आवागमन शुरू हुआ। भूवैज्ञानिक और वैज्ञानिक परीक्षणों से ज्ञात होता है कि ये बर्फ की शिलाएं करीब 1000 साल पुरानी है।
ये बिल्कुल बर्फ के शिवलिंग के समान दिखती है।अमरनाथ के शिवलिंग मंदिर और ईस्रीसनवेल्ट गुफाओं में एक अन्यसमानता यह भी है कि यहां बर्फ का गठन बारहमासी नहीं है। ये दोनों गुफाएं गतिशील और चक्रीय मौसम परिवर्तनों से प्रभावित होती है। इनमें पड़ी दरारें यहां आने वाली हवा को तरल रूप में यहां से वहां प्रवाहित होने देती है। गुफाओं के भीतर का तापमान बाहर के तापमान की तुलना में सर्दियों में गर्म और गर्मियों में ठंडा रहता है। सर्दियों में जब गुफाओं में हवा अपेक्षाकृत गर्म होती है तो बाहर के वायुमण्डल की ठंडी हवा आकार गुफाओं की निचली सतह के क्षेत्र को जमाव बिंदु से नीचे ले आती है। गर्मियों में ये बर्फ की शिलाएं गलना शुरू हो जाती है और इनका प्रतिरूप उत्कृष्ठ प्रतिमाओं के रूप देखा जा सकता है ।

No comments:
Post a Comment